Friday, 18 March 2011

शराब चीज़ ऎसी है शराब पीते हैं
खानाखराब जैसी है शराब पीते हैं

Tuesday, 15 March 2011

                    कल मेरे पास एक एस एम् एस आया ..
किसी ने पूछा :वो कौन सी जगह है जहाँ हर गलती हर गुनाह हर जुर्म माफ़ हो जाते हैं
          ...a little child smiled and said..."MY MOM'S HEART".........

Thursday, 10 March 2011

दीद-ओ-दिल तेरे नजात पे रोना आया ........



आज दिल के सवालात पे रोना आया
ख्याल ऐसे थे ख्यालात पे रोना आया 

बात चुप रह कर कह देते दुनिया वाले
उलझे प्रश्नों के कायनात पे रोना आया

मैं जीता रहा मर मर कर जीता ही रहा
आज खुद अपनी हयात पे रोना आया    

 

जब गुजरा हूँ मैं तेरे दरख़्त से करीब
तेरे दर पे सुनी हर बात पे रोना आया

रात गुजरती है आँसुओं,शराबखानो में
दीद-ओ-दिल तेरे नजात पे रोना आया 

तूने मजबूरियों का नाम रखा जो "अजीब"  

सिसकतीं गुर्बत के हालात पे रोना आया  

Monday, 7 March 2011

एक शराबी का दर्द ................



मैं,मेरा देश,मीडिया.............और शराब...............

आज के हालात को देखते हुए मैंने सोचा आज शाम रंगीन कर ली जाए बहुत दिनों से चारो ओर भ्रष्टाचार का गाना बज रहा था,मनमोहन बदनाम हुआ सोनिया तेरे लिए की तर्ज़ पे,मैंने भी सोचा चलो कुछ आज साकी के दरवाज़े चल के तबियत हरी करते हैं किंतुं जब मयखाने पहुंचा तो साहेबान यहाँ बड़े बड़े शेर गीदड़ बने बैठे थे.सिर्फ आपसी वार्तालाप में सरकार को भ्रष्टाचार वा मंहगाई के लिए कोस रहे थे,मुझसे रहा नही गया एक साहेबान से पूछ लिया

भैया ये आप भ्रष्टाचार वा मंहगाई का रोना क्यों रोते हो? आखिर आप सब शेर हैं और फिर उसपे ऐसा रोना क्यों ?
साहेबान बोले : भाई जान सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार वा मंहगाई तो पूरे हिन्दुस्तान में नही सिर्फ उत्तर प्रदेश पे आई हुई है

मैंने पूछ दिया : भाई ऐसा क्यों कह रहे हो

वो बोले : और क्या भाईजान एक तो ये मंहगाई इतनी हो गयी है कि अब दारु भी पीने के लिए सोचना पड़ता है पता नही सरकार क्यों भ्रष्टाचार के लिए स्विस बैंक का दरवाजा खटखटा रही है? जाने क्यों सुप्रीम कोर्ट सरकार को फटकार लगाती है अगर भ्रष्टाचार देखना है तो कानपुर और उसके आस पास के जिले में आइये और भ्रष्टाचार का आंकडा देखिये कैसे नंबर दो का पैसा कमाया जाता है कैसे टैक्स चोरी होती है?
मैंने कहा : भाई तुम किस बात पे ये भ्रष्टाचार की बात कर रहे हो ये तो सब जगह भगावान विष्णु की तरह व्याप्त है ?
वो बोले: नही भाईजान एक ताज़ा आंकड़ा मेरे से लो आपकी आँखे और पिच्छू दोनों खुल जायेंगी

मैं हँस पड़ा उसकी बात सुनके..वो ऍफ़ एम् रेडिओ माफिक बोला....

सलाम इंडिया...

एक क्वाटर की कीमत आप क्या अंदाज़ लगाते है
मैंने पूछा : कौन सी ?
वो बोला : आप जो पी रहे हैं
मैंने कहा : भाई प्रिंट है ११० रूपए
बोला : ली कितने में
मैंने कहा : १२५ रुपए में
वो बोला : भाईजान कैलकुलेटर उठाइये और जोडिये,
मैंने कहा : ठीक है
वो बोला ; एक ठेके में कम से कम १००० क्वाटर पर डे बिकती है
मैंने कहा : हाँ लगभग १००० बिक जाती है
बोला : एक दिन में १००० क्वाटर गुणा कीजिए १५ का
मैंने कहा : किया
वो बोला : कितना आया
मैंने कहा : १५०००
वो बोला : ऐसे ही हाफ ५०० इन टू ३० रूपए कीजिए
मैंने कहा : हाँ १५००० आया
वो बोला : ऐसे ही बोतल का २०० इन टू ६० कीजिए
मैंने कहा १२००० आया
वो बोला : अब जोडिये
मैंने कहा : हाँ एक दिन की कमाई कच्चे की ४२००० एक ठेके की
वो बोला : ४२००० एक दिन में अब ३६५ दिन का गुणा कीजिए
मैंने कहा : एक करोड़ तिरेपन लाख तीस हज़ार रूपए
वो बोला कानपुर में लगभग कितने ठेके हैं
मैंने कहा : होंगे करीब १०० से १५० के करीब
वो बोला : चलिए सौ मान लीजिये
मैंने कहा : ठीक है
वो बोला अब सौ से इसका गुणा करिए
मैंने कहा : १,५३,३०,००,००० एक अरब तिरेपन करोड़ तीस लाख रुपया सिर्फ साल का...
वो बोला :अब बोलिए भाईजान खाम-खा ये सब स्विस बैंक जा रहे है अरे उत्तर प्रदेश आ जाए देख ले

इसमें ना मीडिया बोलता है ना सरकार ना पब्लिक ना कोई नेता

क्योंकि यहाँ सभी भ्रष्टाचारी है................................
और हम सब इनको बढ़ावा दे रहे हैं क्योंकि

ये पब्लिक है इसको आदत हो चुकी है ....

Saturday, 5 March 2011

जी हाँ मैं हिन्दुस्तान का एक बेरोजगार अपनी बात कहना चाहता हूँ ....

जी हाँ मैं हिन्दुस्तान का एक बेरोजगार अपनी बात कहना चाहता हूँ मैं जानता हूँ आप सब मेरी बातों को अन्यथा ले जायेंगे क्योंकि मेरा वैचारिक एकीकरण आपके जेहन में एक प्रहार सा कर सकता है,

मैं अक्सर सोचता हूँ कि अगर इस देश में देखा जाये तो सर्वाधिक योगदान युवाओं ने दिया है किंतुं युवाओं को ये देश क्या दे रहा है,युवा जो आर्थिक मानसिक,सामाजिक, रूप से देश में सक्रिय रहता है किन्तु क्या कभी किसी ने युवाओं के हालात पर गौर करने की ज़हमत उठाई है,हम युवा,देश की, समाज की,क्रांतिवीरों को बातें करते हैं आज के हालत की बाते करते हुए आपसी विचारधारा में उलझ जाते हैं क्योंकि हमे बचपन से ही उलझाया जाता है बचपन में ही इतिहास के उन पन्नो में जिसमे पिछली पीढ़ी के क्रांतिवीरों ने अपनी कुर्बानियां दी, उनके बारे में बताया जाता है कि किस प्रकार देश के वीरों ने अंग्रेजों के पैर उखाड़ फेकें,क्योंकि गोरों को हमारे देश में अत्याचारी,हिंसक, अशिष्ट, और भी ना जाने क्या क्या कहा गया है और युवा क्रांतिवीरों को जिन्होंने इस देश के सम्मान के लिए अपना सर्वस्य न्योछावर किया, उनको क्या दिया, सिर्फ चौराहों पे एक बुत बना के खड़ा कर दिया जिसपे पशु -पक्षियों को अपना पेट हल्का करने की सुविधा निशुल्क दी गयी, बहुत हँसी आती है जब किसी पार्टी को धरना प्रदर्शन करना होता है तो वो पार्टी इन बुतों के बगल में खड़े होकर जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं किंतुं एक लोटा पानी इन शहीदों के नाम नही देते,मुझे आज भी याद है स्वर्गीय राजीव गांधी देश के युवा नेता के रूप आये और स्वर्गीय इंदिरा जी के बाद प्रधान मंत्री बने तो उन्होंने सबसे पहले इस देश में कम्प्यूटर और सूचना तन्त्र के आगे बढाया अगर वो उस समय ऐसा ना कर गये होते तो आज भी हम सब मिटटी के तेल के दिए अपने घर में जला रहे होते,और बैलगाड़ियों से चल रहे होते उस समय राजीव जी ने एक बात बोली थी कि दिल्ली से चला एक रुपया गरीबों तक पहुचते पहुचते पंद्रह पैसे में तब्दील हो जाता है, तब हम सबको देखना चाहिए था कि अपने देश का प्रधानमंत्री ही नही अपने देश का एक अदना नेता भी युवा होना चाहिए कि कम से कम देश तरक्की करेगा और युवा वर्ग कहीं ना कहीं अपना मार्ग खोज कर लेगा,

किंतुं बहुत शर्म की बात है हम युवा आज भी उन्ही पुरानी विचारधारा में जी रहे हैं कि मैं कांग्रेसी मैं भाजपा का या मैं फलानी पार्टी से सम्बन्ध रखता हूँ अरे आप ही बताएं आपकी पार्टी में युवा कितने हैं और युवाओं के लिए आपकी पार्टी ने अपनी विचारधारा के अंतर्गत क्या किया सिर्फ अपनी पार्टी को आगे बढाने के लिए बाबरी मस्जिद का विध्वंस कराया, अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए युवा वर्ग को विशेष ट्रेनिग दे कर उनके मन में देश के खिलाफ जहर बोया गया या तो उन्हें आतंकवादी बनाया गया या नक्सलवादी, क्योंकि विदेश में बैठे आकाओं को युवाओं की कार्य क्षमता पे पूरा विश्वास है कि युवा वर्ग पीछे नही हटता किंतुं युवा कभी अपने लिए नही सोच रहा है वो सोच रहा है कि मैं दबंग का सलमान खान हूँ बैक कालर में चश्मा टांग के चौराहों पे खड़े होके लडकी देख फब्तियां कसने को कहो किसी को बहन बेटी माँ की गाली देने को कहो बीयर की बाटल लेकर सिगरेट से धुवाँ के छल्लों के बीच से धुवाँ निकालने को बोलो मगर देश के लिए मत बोलो,ना संस्कृति के लिए,क्योंकि युवाओं को चिंता नही है कि हम सब कहाँ जा रहे हैं, मैं ना राहुल गांधी को गलत ठहराता हूँ ना वरुण गांधी को ना एनी किसी युवा नेता को बस इतना जानता हूँ कि

ये देश ये बुड्ढे बेच के खा जायेंगे और हम सब जनखों के माफिक बैठ कर ताली बजायेंगे, मैं ये नही कहता कि आप किसी पार्टी विशेष को देखो मैं तो ये कहता हूँ अपना भविष्य देखो एक हो अपनी युवा सरकार खुद बनाओ जिस देश में युवा पद पे होंगे ये सारी समस्याएं नब्बे प्रतिशत अपने आप खत्म हो जायेंगी क्योंकि इन बुड्ढों के पास रुपया पचाने कि क्षमता हम युवाओं से ७० प्रतिशत अधिक है कि एक जादूगर के माफिक रुपया गायब.हज़म हो गया और कानून कि लचर व्यवस्था जब तलक देखेगी तब तलक २५० करोड़ रुपया सी बी आई की जांच में खत्म मामला वही बेफोर्स तोप वाला ढाक के तीन पात.....

सिर्फ ये देखिये अगर आपका लीडर जिसको आप चुनाव लडवा रहे हैं उसकी शिक्षा के साथ साथ उसकी उम्र ४० साल के अन्दर हो शिक्षा कम से कम पोस्ट ग्रेजुएट हो इससे नीचे नही अगर आप सब ऐसा नही कर सकते तो रोईये नही कि मैं बेरोजगार भ्रष्टाचार हाय मंहगाई, कुछ नही कर सकते हम सब क्योंकि हम सब अपनी नैया डुबाने का खुद अधिकार रखते हैं क्योंकि हम सब आज़ाद हैं और हम सब आदी या नशेबाज़ हो चुके हैं की हमारे खुजली है मारो मेरी...................

Friday, 4 March 2011

टूटकर "अजीब" तमाँ उम्र निभाया है..........

रकीबे-गमजदा जो मुस्कराया है
चरागे-दिल अँधेरे में जलाया है

उठे हिजाब करिश्मे निगाहें-नाज़ हो
सवाबो-गुनह नाजो-नूर पाया है

सकूते होश में रश्के-ज़न्नत मिले
लड़खड़ाये तो साकी का नशा छाया है

झुके नज़र आँखों में हज़ारों खूबियाँ
उठे नज़र तो मुकद्दर बदल आया है

यादे-अय्याम-रंजों-गम की अदा
टूटकर "अजीब" तमाँ उम्र निभाया है

Tuesday, 1 March 2011

अपनी जिन्दगी की किताब ऎसी है...........


अपनी जिन्दगी की किताब ऎसी है
रफ़्तार-ए-क़लम महताब जैसी है

दौर-ए-फुरकत  लिखते हैं बार बार
साथ दिल का मिले आफताब जैसी है

जिन्दगी की नाँव भी चलती डगर डगर
साहिल मिले हुस्न-ए-ख्वाब जैसी है

कब्र में पैर लटका के कहता बुढा शज़र
शक्ल उसकी भी देखो गुलाब जैसी है


पढ़ चुके हैं जो दिल की सारी ख्वाहिशें
हर तमन्ना में ख़लिश अज़ाब जैसी है

"अजीब" समझना हो समझ ले तू
मुफलिसी की जवानी शराब जैसी है

Monday, 28 February 2011

Friday, 25 February 2011

होश खोते रहे उनके होठों में भी प्यास हो........



 
मुद्दत से मुन्तजिर रहे जिसके,
जब उनसे मुलाक़ात हो,

पूनम की रात हो
चांदनी की बरसात हो

खामोश हो तहाइयां
और एक जरुरी बात हो

बाहों का आशियाना हो
सुन्दर ख्यालात हो
खुलूसो-प्यार का मरहम हो
कुर्बत की महकात हो

होश खोते रहे उनके
होठों में भी प्यास हो

खुश्बू घुलें फ़ज़ाओं में
दिलकश से हालात हो

ना रहे ताबीर मुश्किल
दुआओं की सौगात हो

मिट जाएँ दूरियाँ दिल की
प्यार की दो बात हो

काश .....

प्यासा ना रहे समुन्दर भी
ज़न्नत से लम्हात हो

"अजीब' भी मुतमईन रहे
जो लबो की बरसात हो


 

 

“मुझे अकसर एक गुमान रहता है...........






“मुझे अकसर एक गुमान रहता है
तू मेरे दिल के दरमियान रहता है

तुझ पे कैसे कोई कर ले यकीन
खता इतनी है तू बेजुबान रहता है

फूल बन शाखों पे तू झूल जाए
सारे चमन को ये गुमान रहता है

कैसे सजदा करे कोई तेरा दिलबर
शामे-फुरकत से जो अन्जान रहता है

बंद कमरों में अक्सर लोग सुनते है
गजलों में मेरे तू दिलों-जान रहता है

मिल जाए उसे कुर्बते-जानाँ यहाँ
"अजीब" अकसर परेशान रहता है "



जब भी खोया तेरे ख्यालों में खोया.......









जब भी खोया तेरे ख्यालों में खोया
जिन्दगी के हंसी सवालों में खोया

आँखों से आंसू गिरे न मिला सुकूं
मयकदे के छलके प्यालों में खोया

पहलू में जाकर उनके जो ढल गये
बाहों के गर्म घेरे सवालों में खोया

दर्दे गम को जब भी नुमायाँ किया
हिज्र की रात को उजालो में खोया

गरीब की बेटी अधेड़ को सौप कर
बाप भी गुर्बत के निवालों में खोया

पाठ नफ़रत कुछ ऐसा पढ़ा गया
इंसा मस्जिद और शिवालों में खोया

छल फरेब का इल्म कैसे हो उन्हें
जिन्दगी जो मकड़जालों में खोया

उम्र गुजारी जिसने खुराफातों में
दोस्त वो "अजीब" मलालों में खोया

तुम मंदिर जाते दुआ के लिए "अजीब"

तुझसे मोहब्बत बेपनाह करता हूँ
ख़्वाबोंमें आने का गुनाह करता हूँ

सुन के आहट तेरे क़दमों की जानां
दर पे तेरे जाने का गुनाह करता हूँ

दिल का आलम भी अजीब होता है
हिज्र में मुस्कराने का गुनाह करता हूँ

है ये किस्मत मेरी या उनका सितम
गमजदा हो जाने का गुनाह करता हूँ

ऐसी क्या अदावत जो दिल में सजोये
मैं रफाकत बढाने का गुनाह करता हूँ

तुम मंदिर जाते दुआ के लिए "अजीब"
मैं मयखाने जाने का गुनाह करता हूँ

अब सोचता हूँ मैं...

वो कितना मेरे पास था अब सोचता हूँ मैं
 
दिल में आमो-ख़ास था अब सोचता हूँ मैं

वो मेरा नसीब था खुशियाँ तमाम लिए
 
न तब होशोहवास था अब सोचता हूँ मैं

वो भी एक इन्सान था करता गया खता
 
गम ही उसके पास था अब सोचता हूँ मैं

बे-मौसम बरस गया सावन की प्यास में
 
वो जीने की आस था अब सोचता हूँ मैं

वो रहा अहले सितम जब तक वो जिया
 
ज़िंदा सी एक लाश था अब सोचता हूँ मैं
 
झूठी तसल्लियों में जिए कैसे "अजीब"
 
प्यारा सा एहसास था अब सोचता हूँ मैं