Thursday, 10 March 2011

दीद-ओ-दिल तेरे नजात पे रोना आया ........



आज दिल के सवालात पे रोना आया
ख्याल ऐसे थे ख्यालात पे रोना आया 

बात चुप रह कर कह देते दुनिया वाले
उलझे प्रश्नों के कायनात पे रोना आया

मैं जीता रहा मर मर कर जीता ही रहा
आज खुद अपनी हयात पे रोना आया    

 

जब गुजरा हूँ मैं तेरे दरख़्त से करीब
तेरे दर पे सुनी हर बात पे रोना आया

रात गुजरती है आँसुओं,शराबखानो में
दीद-ओ-दिल तेरे नजात पे रोना आया 

तूने मजबूरियों का नाम रखा जो "अजीब"  

सिसकतीं गुर्बत के हालात पे रोना आया  

2 comments:

  1. बात चुप रह कर कह देते दुनिया वाले
    उलझे प्रश्नों के कायनात पे रोना आया

    sunder abhivyakti, dard samete hue.

    shubhkamnayen

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