आज दिल के सवालात पे रोना आया
ख्याल ऐसे थे ख्यालात पे रोना आया
बात चुप रह कर कह देते दुनिया वाले
उलझे प्रश्नों के कायनात पे रोना आया
मैं जीता रहा मर मर कर जीता ही रहा
आज खुद अपनी हयात पे रोना आया
जब गुजरा हूँ मैं तेरे दरख़्त से करीब
तेरे दर पे सुनी हर बात पे रोना आया
रात गुजरती है आँसुओं,शराबखानो में
दीद-ओ-दिल तेरे नजात पे रोना आया
तूने मजबूरियों का नाम रखा जो "अजीब"
सिसकतीं गुर्बत के हालात पे रोना आया

ek behtreen gazal
ReplyDeleteबात चुप रह कर कह देते दुनिया वाले
ReplyDeleteउलझे प्रश्नों के कायनात पे रोना आया
sunder abhivyakti, dard samete hue.
shubhkamnayen