रकीबे-गमजदा जो मुस्कराया है
चरागे-दिल अँधेरे में जलाया है
उठे हिजाब करिश्मे निगाहें-नाज़ हो
सवाबो-गुनह नाजो-नूर पाया है
सकूते होश में रश्के-ज़न्नत मिले
लड़खड़ाये तो साकी का नशा छाया है
झुके नज़र आँखों में हज़ारों खूबियाँ
उठे नज़र तो मुकद्दर बदल आया है
यादे-अय्याम-रंजों-गम की अदा
टूटकर "अजीब" तमाँ उम्र निभाया है
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