Friday, 4 March 2011

टूटकर "अजीब" तमाँ उम्र निभाया है..........

रकीबे-गमजदा जो मुस्कराया है
चरागे-दिल अँधेरे में जलाया है

उठे हिजाब करिश्मे निगाहें-नाज़ हो
सवाबो-गुनह नाजो-नूर पाया है

सकूते होश में रश्के-ज़न्नत मिले
लड़खड़ाये तो साकी का नशा छाया है

झुके नज़र आँखों में हज़ारों खूबियाँ
उठे नज़र तो मुकद्दर बदल आया है

यादे-अय्याम-रंजों-गम की अदा
टूटकर "अजीब" तमाँ उम्र निभाया है

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