Friday, 25 February 2011

जब भी खोया तेरे ख्यालों में खोया.......









जब भी खोया तेरे ख्यालों में खोया
जिन्दगी के हंसी सवालों में खोया

आँखों से आंसू गिरे न मिला सुकूं
मयकदे के छलके प्यालों में खोया

पहलू में जाकर उनके जो ढल गये
बाहों के गर्म घेरे सवालों में खोया

दर्दे गम को जब भी नुमायाँ किया
हिज्र की रात को उजालो में खोया

गरीब की बेटी अधेड़ को सौप कर
बाप भी गुर्बत के निवालों में खोया

पाठ नफ़रत कुछ ऐसा पढ़ा गया
इंसा मस्जिद और शिवालों में खोया

छल फरेब का इल्म कैसे हो उन्हें
जिन्दगी जो मकड़जालों में खोया

उम्र गुजारी जिसने खुराफातों में
दोस्त वो "अजीब" मलालों में खोया

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