तुझसे मोहब्बत बेपनाह करता हूँ
ख़्वाबोंमें आने का गुनाह करता हूँ
सुन के आहट तेरे क़दमों की जानां
दर पे तेरे जाने का गुनाह करता हूँ
दिल का आलम भी अजीब होता है
हिज्र में मुस्कराने का गुनाह करता हूँ
है ये किस्मत मेरी या उनका सितम
गमजदा हो जाने का गुनाह करता हूँ
ऐसी क्या अदावत जो दिल में सजोये
मैं रफाकत बढाने का गुनाह करता हूँ
तुम मंदिर जाते दुआ के लिए "अजीब"
मैं मयखाने जाने का गुनाह करता हूँ
ख़्वाबोंमें आने का गुनाह करता हूँ
सुन के आहट तेरे क़दमों की जानां
दर पे तेरे जाने का गुनाह करता हूँ
दिल का आलम भी अजीब होता है
हिज्र में मुस्कराने का गुनाह करता हूँ
है ये किस्मत मेरी या उनका सितम
गमजदा हो जाने का गुनाह करता हूँ
ऐसी क्या अदावत जो दिल में सजोये
मैं रफाकत बढाने का गुनाह करता हूँ
तुम मंदिर जाते दुआ के लिए "अजीब"
मैं मयखाने जाने का गुनाह करता हूँ

No comments:
Post a Comment