“मुझे अकसर एक गुमान रहता है
तू मेरे दिल के दरमियान रहता है
तुझ पे कैसे कोई कर ले यकीन
खता इतनी है तू बेजुबान रहता है
फूल बन शाखों पे तू झूल जाए
सारे चमन को ये गुमान रहता है
कैसे सजदा करे कोई तेरा दिलबर
शामे-फुरकत से जो अन्जान रहता है
बंद कमरों में अक्सर लोग सुनते है
गजलों में मेरे तू दिलों-जान रहता है
मिल जाए उसे कुर्बते-जानाँ यहाँ
"अजीब" अकसर परेशान रहता है "

एक बेहतरीन ग़ज़ल गोविन्द
ReplyDeleteअसीम प्यार की अभिव्यक्ति